एक ताज़ा शेर,
तुझे देखने की ख्वाईश
दिल मॆं छुपाता हूँ
तुझे मिलने की गुज़ारिश
दिन रात करता हूँ
हैं जो कोई बात तुझमे
तेरी तरफ़ खींचा चला आता हूँ
इश्क की ये जो बारिश हैं
बनकर मै बरसना चाहता हूँ
बनकर मै बरसना चाहता हूँ...........
#Prafullashinde
Taza sher bhot khub pr kuch jwab to denge jnab jaise?
ReplyDeleteKise dekhne ki?
Kinse milne ki?
Kiski traf?
Kinpe brsna hai?