कॉलेज कट्ट्यावर लिहिलेली कविता ..........
फॉर KK-series
"अलविदा"
जाने क्या साथ ले जायेंगे
जान यहीं पर छोडके
दिल दोस्ती दुनियादारी
सब रिश्ते बंधन तोडके (1)
साँस अटकी हैं मेरी इन
पत्थरों की दीवारों में
साथ बिताये चार साल
उन सभी मेरे यारो मे (2)
दिन जाने का खुदाने
गर तय किया होता
लौटकर आने का फिर
इरादा ना किया होता (3)
खयाल रखना दोस्तों
जिन्दगीका हँसते हंसते
कोई सफ़र जिंदगी का
चलना आहिस्ते आहिस्ते (4)
जाने का यहाँ से अब भी
कीसीका जी नहीँ करता
चलो कहे अलविदा यारो
वक्त तो कभी नहीँ ठहरता (5)
- प्रफुल्ल शिंदे
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